रविवार 14 जून 2026 - 17:09
भारतीय धार्मिक विद्वानों का परिचय | अल्लामा मोहम्मद शाकिर अमरोहवी

पेशकश: दनिश नामा ए इस्लाम, इन्टरनेशनल नूर माइक्रो फ़िल्म सेंटर दिल्ली

हौज़ा न्यूज़ एजेंसी के अनुसार, अल्लामा सय्यद मोहम्मद शाकिर अमरोहवी पंद्रह ज़िलहिज सन (तेरह सो सेंतालीस) हिजरी सरज़मीने अमरोहा के एक इल्मी घराने में पैदा हुए, आपके वालिद सय्यद अहमद निहायत दीनदार ओर मुत्तक़ी शख्स थे |

अल्लामा को अहले इल्म “अरस्तुए हिन्द” के लक़ब से भी याद करते हैं, आप ने इब्तेदाई तालीम अपने ही महल्ले मे हासिल की उसके बाद महल्ला हक़क़ानी के प्राइमरी स्कूल में चोथी क्लास तक कस्बे फ़ैज़ किया, फिर सय्यदुल मदारिस में दाखला लिया ओर मोलाना सय्यद फखरूल हसन, मोलाना सय्यद नसीम हसन, मोलाना सफ़ी मुर्तज़ा, मोलाना मोहम्मद इबादत ओर सय्यदुल मिल्लत मोलाना सय्यद मोहम्मद वगैरा से दरजे मोलवी तक मुखतलिफ़ उलूम की किताबें पढ़ीं |

सय्यदुल मदारिस के बाद लखनऊ जाकर जामेया नाज़मिया मे दाखला ले लिया ओर जय्यद असातेज़ा से कसबे फ़ैज़ किया जिनमें से मोलाना सय्यद मोहम्मद मेहदी ज़ंगीपुरी, मोलाना शेख मंजूर हुसैन रजैटवी,मोलाना गुलाम मेहदी मुजतहिद सिंधी, बाबाए फ़लसफ़ा मोलाना अय्यूब हुसैन सिरस्वी, मोलाना सय्यद रसूल अहमद गोपालपुरी, मोलाना सय्यद मोहम्मद हाशिम, मोलाना सय्यद मोहम्मद मुर्तजा रदोलवी,अल्लामा सय्यद अदील अख्तर, सय्यदुल ओलमा आयतुल्लाह सय्यद अली नक़ी, मुफ़्ती ए आज़म सय्यद अहमद अली ओर ताजुल ओलमा सय्यद मोहम्मद ज़की वगैरा के असमा क़ाबिले ज़िक्र हैं , अल्लामा ने मदर्सए नाज़मिया से मुमताज़ुल अफ़ाज़िल, लखनऊ यूनिवर्सिटी से फ़ाज़िल ओर शिया कालेज से इमादुल कलाम की सनद हासिल की |

मुफ़्ती अहमद अली ने आपकी इल्मी सलाहियत ओर आला क़ाबिलियत को देख कर तालिबे इल्मी के दोरान ही मदर्सए नाज़मिया में उस्ताद की हैसियत से मुंतखब कर लिया जबके आप दर्जाए मुमताजुल अफ़ाज़िल में ज़ेरे तालीम थे, आपने आलिम, काबिल,ओर फ़ाज़िल की क्लास के तुल्लाब को तदरीस की |

मोलाना का अंदाज़े तदरीस मुंफरिद था, मुश्किल ओर दक़ीक मतालिब को आसान ओर लतीफ़ मिसालों के ज़रिये हल फ़रमाकर ज़ेहन नशीन करा देते थे,मोसूफ़ के तबह्हुरे इल्मी का अंदाज़ा अज़्ज़फ़्रतो अलज़ ज़फ्रा, रुयतुल हिलाल शरहे हमदुल्लाह शरहुश शम्स अलबाज़ेगा, तफ़सीरे कुलेनी, शरहे वजीज़ा, शरहे तजरीद शरहो तहक़ीक़ बाबे क़तओ ज़न ओर फराइदुल उसूल शेख़ अंसारी वगैरा जैसे दक़ीक़ आसार से लगाया जा सकता है |

आपने नजफ़े हिन्द जोगीपुरा मे क़याम के दोरान इल्मी, अदबी, ओर तहक़ीक़ माहनामा बनामे “नजफ़े हिन्द” का इजरा किया जो एक मेयारी रिसाला शुमार किया जाता था, ये मजल्ला अपने मुंफरिद वा मशमूलात के सबब बहुत जल्द मक़बूले खासो आम हुआ |

मोलाना के शागिर्दों की एक तवील फेहरिस्त है जिनमें से : मोलाना सय्यद सफ़ी हैदर, मोलाना सय्यद अतहर अब्बास, मोलाना सय्यद तालिब हुसैन जैदी, मोलाना सय्यद बेदार हुसैन, मोलाना मुजतबा हुसैन अदीबुल हिन्दी, मोलाना सय्यद मोहम्मद जाबिर, मोलाना नाज़िम अली खैराबादी, मोलाना नईम अब्बास आबेदी, मोलाना मज़ाहिर हुसैन सेथली ओर प्रोफेसर मोलाना सय्यद फ़रमान हुसैन वगैरा के असमा क़ाबिले ज़िक्र हैं

तदरीस के अलावा अल्लामा ने मदरसे की दिगर जिम्मेदारयों को बा नहवे अहसन निभाया मसलन नाज़िमे मजलिसे असातेज़ा, नाज़िमे इमतहानात ओर मजलिसे मुंतज़ेमा के मिंबर थे, सन उन्नीस सो बासट ईस्वी में आपने जामिया नाज़मिया के अफ़ाज़िल की ज़हमात को सराहते हुए उनकी याद में एक अलहदा किताब खाना “दारुल आसार” के नाम से क़ायम किया |

आपके इल्मी खिदमात के हमराह तामीरी खिदमात की तरफ़ भी मुतवज्जो थे, मुखतलिफ़ शहरों ओर क़रयों में मदारिस, मसाजिद ओर इमामबारगाह तामीर कराए जिनमें से जोली मुज़फ्फ़र नगर, अकबरपुर ज़िला सीतापुर, ताल गाउँ ज़िला सीतापुर, कानपुर ओर लखनऊ वगैरा के असमा क़ाबिले ज़िक्र हैं

मोसूफ़ की इल्मी व फ़लसफ़ी खिदमात का एतेराफ़ अहले इल्म ने किया जिसमें अयतुल्लाह जाफ़र सुबहानी ने कुमुल मुक़ददेसा ईरान में एवार्ड से नवाज़ा उसके अलावा ईरान कल्चर हाउस नई देहली की जानिब से आप की “मारेकतुल आरा” अज़्ज़फ़्रतो अलज़ ज़फ्रा की क़द्रदानी करते हुए शहीद मुतह्हरी एवार्ड से नवाज़ा गया |

आप हर साल ओरंगाबाद ज़िला बुलंद शहर में मोहर्रम का अशरा खिताब फ़रमाते ओर सात मोहर्रम को अमरोहा आ जाते थे, जब उनसे सवाल किया गया आप दोराने अशरा अमरोहा कैसे तशरीफ़ ले आते हैं? आपने जवाब दिया : जिस वक़्त मैंने ज़ाकरी शुरू की थी तो अल्लाह से दुआ की थी की मुझे ऐसी जगह अशराए मजालिस के लिए भेजना जहां कम अज़ कम किसी ऐक तारीख में अमरोहा की अज़ादारी में शरीक हो सकूँ |

आखिरकार ये इलमो फज़्ल का दरख्शाँ माहताब सत्ताईस शाबान सन चोदह सो तेतीस हिजरी) में लखनऊ की सरज़मीन पर गुरूब हो गया, अमीरुल ओलमा मोलाना सय्यद हमीदुल हसन ने मजलिसे सय्यदुश शोहदा के ज़रिये मदरसे के उस्ताद को अलविदा कहकर अमरोहा के लिए रुखसत किया (अटठाईस शाबान सन चोदह सो तेतीस हिजरी) सुबह आठ बजे शरीअत कदा से हज़ारों आहो बुका के हमराह ओलमा फ़ोज़ला ओर कसीर मोमेनीन की मोजूदगी में जनाज़ा बरामद हुआ, आई.एम इंटर कालेज अमरोहा के मैदान में हुज्जतुल इस्लाम मोलाना डाक्टर सय्यद मोहम्मद सियादत साहब क़िबला ने नमाज़े जनाज़ा पढ़ाई ओर अज़ाखनाए शिफ़ात पोता में सुपुर्दे ख़ाक किया

        

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